जयपुर: दादूपालका भैराणा धाम में रीको के विरोध में चल रहे आंदोलन ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। दादूपालका भैराणा धाम बचाओ संघर्ष समिति ने प्रशासन द्वारा गठित की जा रही समिति में शामिल होने से इनकार कर दिया है। इसके अतिरिक्त, संघर्ष समिति ने जयपुर कूच के दौरान मंच से की गई राजनीतिक बयानबाजी से भी स्वयं को पृथक कर लिया है। संघर्ष समिति की ओर से दादूपीठ नरायणा (नरैना) के पीठाधीश्वर ओमदास महाराज की उपस्थिति में आज सोमवार को जयपुर में एक प्रेस वार्ता आयोजित की गई, जिसमें व्यवस्थापक हरिओम स्वामी ने यह स्पष्ट किया कि 27 मई को प्रशासन ने भैराणा में रीको का कार्य स्थगित करने की घोषणा की थी, जबकि रीको का कार्य पहले से ही बंद था।

जयपुर कूच से पूर्व ही सहमति बन चुकी थी: हरिओम स्वामी ने बताया कि संत शिरोमणि दादूदयाल महाराज की तपोस्थली के संरक्षण, संवर्धन एवं सुरक्षा हेतु 5 अप्रैल को मौजमाबाद उपखंड अधिकारी को ज्ञापन प्रस्तुत कर आंदोलन का सूत्रपात किया गया था। तत्पश्चात, 15 अप्रैल से भीषण ग्रीष्मकाल के मध्य संतों द्वारा अग्नितप साधना प्रारंभ की गई। संघर्ष समिति ने 26 मई को जिला प्रशासन के माध्यम से सरकार को सात सूत्रीय ज्ञापन प्रेषित किया। इन बिंदुओं पर अधिकारियों के साथ सकारात्मक विचार-विमर्श हुआ और अधिकांश बिंदुओं पर सहमति भी स्थापित हो गई थी।
संत प्रशासन की समिति में शामिल नहीं होंगे: उन्होंने बताया कि 27 मई को महापंचायत और जयपुर कूच के बाद सात बिंदुओं पर व्यावहारिक समाधान निकालने पर सहमति बनी थी, लेकिन उन पर बिंदुवार चर्चा नहीं हुई. उसी समय प्रशासन ने रीको का काम स्थगित करने की घोषणा की थी, लेकिन वास्तविकता यह है कि रीको का काम पहले से ही बंद था. उन्होंने आगे कहा कि रीको औद्योगिक क्षेत्र के भविष्य के कार्यों की समीक्षा के लिए प्रशासन ने एक समिति बनाने का आश्वासन दिया था, लेकिन इस समिति के अधिकार क्या होंगे, इसकी अध्यक्षता कौन करेगा और इसमें संतों की क्या भूमिका होगी, इस बारे में कोई स्पष्टता नहीं है, इसलिए संघर्ष समिति ऐसी किसी भी समिति में शामिल नहीं होगी..
समिति पर्यावरण संरक्षण का समर्थन करती है: उन्होंने इस बात पर बल दिया कि 27 मई को भैराणा धाम संघर्ष समिति के मंच से साधु-संतों के बीच जो भी राजनीतिक वक्तव्य दिए गए हैं, संत समाज उनसे सहमत नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि संघर्ष समिति ने आज जिला प्रशासन से वार्ता हेतु समय निर्धारित किया है। इस वार्ता में 26 मई को प्रस्तुत ज्ञापन के बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि हम पर्यावरण संरक्षण के प्रबल समर्थक हैं, किंतु विकास के विरोधी नहीं हैं। संघर्ष समिति इस संपूर्ण प्रकरण के संतुलित समाधान की दिशा में सक्रिय रूप से प्रयास करेगी।
क्या था पूरा मामला
भैराणा धाम में प्रस्तावित रीको औद्योगिक क्षेत्र से संबंधित विवाद निरंतर चर्चा का विषय बना हुआ है। इस विषय पर बुधवार को एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम देखने को मिला, जब जिला प्रशासन और साधु-संतों के मध्य हुई वार्ता के उपरांत यह मामला मंत्री स्तरीय चर्चा तक पहुंच गया। प्रारंभिक चरण की बैठक जिला प्रशासन के साथ संपन्न हुई, जिसके पश्चात संत समाज ने वार्ता को सकारात्मक बताया, किंतु साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि जब तक कोई लिखित आश्वासन अथवा आदेश प्राप्त नहीं होता, तब तक धरना जारी रहेगा।
भैराणा धाम संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि उनकी मांगों को केवल मौखिक आश्वासनों के आधार पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। उनका कथन है कि जब तक कोई ठोस निर्णय और लिखित आदेश प्रस्तुत नहीं होता, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। इस संपूर्ण प्रकरण में मंत्रिमंडल उप-समिति के गठन पर भी विचार-विमर्श किया गया, ताकि समाधान की दिशा में प्रगति की जा सके। प्रशासन की ओर से भी संकेत प्राप्त हुए हैं कि संत समाज के साथ वार्ता का क्रम भविष्य में भी जारी रहेगा।
इस वार्ता में जयपुर रेंज आईजी राहुल प्रकाश, जिला कलेक्टर संदेश नायक और एसपी हनुमान मीना उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों ने दोनों पक्षों के मध्य सहमति स्थापित करने का प्रयास किया और स्थिति को शांतिपूर्ण ढंग से आगे बढ़ाने पर बल दिया।
इसके पश्चात् यह प्रकरण और आगे बढ़ा तथा भैराणा धाम संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों के साथ मंत्री जवाहर सिंह बेढम के निवास स्थान पर भी वार्ता प्रारंभ हुई. इस बैठक में मंत्री सुमित गोदारा, मंत्री जवाहर सिंह बेढम, आईजी राहुल प्रकाश, कलेक्टर संदेश नायक और एसपी हनुमान मीना भी उपस्थित थे. जिला प्रशासन की बैठक के उपरांत सीधे मंत्री आवास पर हुई इस चर्चा को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
प्राप्त जानकारी के अनुसार, दोनों पक्षों के मध्य मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई और समाधान खोजने का प्रयास किया गया. यद्यपि, अभी तक किसी भी प्रकार का अंतिम निर्णय घोषित नहीं हुआ है. संत समाज और संघर्ष समिति का यह कथन है कि वे अपने दृष्टिकोण पर अडिग हैं और जब तक लिखित आश्वासन प्राप्त नहीं होता, आंदोलन समाप्त नहीं होगा.
वहीं, प्रशासन और सरकार की ओर से भी यह संकेत प्राप्त हुए हैं कि इस प्रकरण को वार्ता के माध्यम से सुलझाने का प्रयास जारी रहेगा. दोनों पक्षों के मध्य आगे भी संवाद होने की संभावना व्यक्त की जा रही है, ताकि किसी सहमति पर पहुंचा जा सके और विवाद का समाधान हो सके.
Kuchaman City News
🚨 कुचामन सिटी में SHO सतपाल सिहाग के समर्थन में उमड़ा जनसैलाब 🚨
कुचामन सिटी में थानाधिकारी (SHO) सतपाल सिहाग के निलंबन के विरोध में आज सर्व समाज के बैनर तले हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। क्षेत्र के नागरिकों, युवाओं, व्यापारिक संगठनों एवं विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों ने विशाल पैदल मार्च निकालकर विरोध प्रदर्शन किया और धरना देकर अपनी नाराजगी जताई।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि SHO सतपाल सिहाग पर की गई कार्रवाई एकतरफा है और बिना निष्पक्ष जांच के एक ईमानदार अधिकारी को निलंबित किया गया है। लोगों ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई राजनीतिक दबाव में की गई है, जिसे क्षेत्र की जनता स्वीकार नहीं करेगी।
आज सुबह निकाला गया पैदल मार्च शहर के प्रमुख मार्गों और बाजारों से होकर गुजरा। इस दौरान "सतपाल सिहाग को बहाल करो" और "न्याय दो" जैसे नारों से पूरा शहर गूंज उठा। इसके बाद सर्व समाज के लोगों ने धरना देकर प्रशासन के नाम ज्ञापन सौंपा और निलंबन आदेश को तत्काल निरस्त करने की मांग की।
📌 प्रमुख मांगें:
✔️ SHO सतपाल सिहाग का निलंबन आदेश तत्काल वापस लिया जाए।
✔️ पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच करवाई जाए।
✔️ दोषियों की पहचान कर उचित कार्रवाई की जाए।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सतपाल सिहाग की ससम्मान बहाली नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा तथा आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा।
📍 कुचामन सिटी, डीडवाना-कुचामन
📰 News 2 Rajasthan
🎤 रिपोर्टर : सागर मारवाड़ी
Disclaimer
यह पोस्ट उपलब्ध जानकारी एवं स्थानीय स्रोतों से प्राप्त विवरण के आधार पर तैयार की गई है। किसी भी आरोप, मांग या बयान को संबंधित पक्षों का आधिकारिक मत नहीं माना जाए। प्रशासनिक निर्णयों एवं जांच से संबंधित अंतिम तथ्य संबंधित विभागों की आधिकारिक पुष्टि के अधीन हैं।
0 Comments